आग जिहाद: एक वाहिद मज़हबी अमल…

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चित्र: इस्लामी आतंकवादी संगठन आइएसआइएस ने आग जिहाद के विषय में अपने समर्थकों के लिए मज़हबी दिशा-निर्देश जारी किए थे

यदि आपने पिछले कुछ वर्षों में घटित हुई प्रमुख घटनाओं पर ध्यान दिया होगा तो आपको यह पता होगा कि लगभग हर सप्ताह ही देश के प्रमुख संस्थानों की इमारतों में एक के बाद एक करके आगज़नी की घटनाएं हो रही हैं। यदि आपको यह लगता है कि देश के अंदर बड़े पैमाने पर आग लगने की ये सारी घटनाएं मात्र एक संयोग हैं तो इसका अर्थ यह है कि आप बहुत ही भोले हैं और आपको अपने दुश्मनों के द्वारा चली जाने वाली चालों के विषय में जानकारी नहीं है।

दरअसल यह ‘आग जिहाद’ इस्लामी जिहाद के 6,666 तरीकों में से एक वाहिद क़िस्म का जिहाद है। इस्लामी दंगों में काफ़िर बस्तियों को नेस्तनाबूद करने, काफ़िर महिलाओं से बलात्कार करने और मर्द काफ़िरों का नरसंहार करके उन्हें वहां से बेदख़ल करने के बाद उनके घरों और संपत्तियों में आग लगाना- ऐतिहासिक रूप से एक ख़ालिस मज़हबी अमल रहा है। अविभाजित भारत के समय से लेकर आज तक बंगाल, कश्मीर एवं पंजाब सहित सिंध क्षेत्रों में अंजाम दिए जा चुके पूर्ववर्ती इस्लामी दंगों में इस ‘आग जिहाद’ के द्वारा ही काफ़िर-बस्तियों को आग के समंदर डुबोकर ग़र्क़ किया गया था।

चित्र: ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले इस्लामी आतंकवादियों ने वहां के जंगलों में आग लगा दी थी

हाल ही कुछ वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय इस्लामी आतंकवादी संगठन आइएसआइएस भी अपने मुस्लिम प्रशंसकों एवं समर्थकों को इस ‘आग जिहाद’ के विषय में मज़हबी दिशा-निर्देश जारी करते हुए देखा गया है। जनवरी 2020 के महीने में ऑस्ट्रेलिया में आग जिहाद की ऐसी ही एक घटना घटित हुई थी जिसमें कि वहां के जंगलों में कई महीनों तक जारी रहने वाली आग में करोड़ों वन्य-जीवों की मौत हो गई थी। बाद में हुई इस घटना की जांच में यह पाया गया था कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले इस्लामी आतंकवादियों ने इस दुर्दांत घटना को अंजाम दिया था जिसमें न केवल करोड़ों जीव-जंतुओं की जानें गईं बल्कि वन-संपदा के नष्ट होने से ऑस्ट्रेलिया को आर्थिक एवं पर्यावर्णिक रूप से भारी नुकसान हुआ।

कोरोना वायरस महामारी से बचाव के लिए भारत सहित पूरी दुनिया को बड़े स्तर पर वैक्सीन की आपूर्ति करने के लिए महाराष्ट्र राज्य के पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने पिछले 6 महीने में लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत से युद्ध-स्तर पर अपनी एक नई इमारत को तैयार किया था। चंद दिनों के अंदर ही संस्थान अपनी इस नई इमारत में कोरोना वायरस की वैक्सीन का निर्माण करने के लिए उद्यत होने जा रहा था। इसी बीच दुर्भाग्यपूर्ण तरीक़े से यह ख़बर सामने आई कि अज्ञात कारणों से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया की वह नई इमारत, आगज़नी का शिकार हो गई!

चित्र: ऑस्ट्रेलिया में अंजाम दिए गए आग जिहाद के परिणामस्वरूप करोड़ों जीव-जंतुओं की जानें चली गईं थी

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया की इस इमारत को आग जिहाद के ज़रिए खाक़ में मिलाकर आग-मुजाहिदीन ने काफ़िरों के टैक्स से अर्जित धन को तो नष्ट किया ही है अपितु उन्होंने भारत में रहने वाले 100 करोड़ काफ़िरों के साथ-साथ दुनिया के अन्य काफ़िर मुल्कों में रहने वाले अपने मज़हब-विशेष के द्वारा घोषित मज़हबी-दुश्मनों को भी राहत न पहुंचने देने के हरसंभव प्रयास किए हैं। हालांकि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया में हुई इस आगज़नी की जांच तो होगी ही परंतु जिस प्रकार से महाराष्ट्र में हिंदू-द्रोही ताक़तें अपने पैर जमाकर बैठी हुई हैं, उसे देखते हुए इस बात में हमें संदेह है कि इस आगज़नी के असली दोषी कभी पकड़े भी जाएंगे।

सनद रहे कि वैश्विक इस्लामी जमात के द्वारा पिछले 1,400 वर्षों से अनवरत अंजाम दी जा रही ‘ग़ज़वा-ए-आलम’ (इस्लाम की दुनिया पर विजय) की इस्लामी जंग अभी भी थमी नहीं है बल्कि यह पहले से अधिक सुनियोजित एवं संगठित तौर पर पेशेवर तरीके से अंजाम दी जा रही है। इसके लिए वर्तमान वैश्विक इस्लामी जमात, दुनिया के ग़ैर-इस्लामी मुल्कों में मौजूद अपनी वर्तमान आबादी को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनको दारुल-इस्लाम बनाने के लिए प्रयासरत है।

चूंकि आग जिहाद के द्वारा मात्र एक झटके में ही काफ़िरों की करोड़ों-अरबों की संपत्तियों को खाक़ में मिलाकर उनको बैकफुट पर लाया जा सकता है। इसलिए भारत सहित दुनिया के जिन मुल्कों में मुस्लिम जनसंख्या एक निश्चित स्तर को पार कर चुकी है, उन मुल्कों में अगले 10-15 वर्षों के अंदर वैश्विक इस्लामी जमात दारुल-इस्लाम की स्थापना करने के लिए आग जिहाद नामक इस विनाशक जिहादी अमल का इस्तेमाल कर रही है।

यदि आपको हमारी बात में किंचित मात्र भी असत्यता के दर्शन हो रहे हों तो आपसे निवेदन है कि आप कृपया पिछले कुछ वर्षों में अंजाम दी गई आगज़नी की ख़बरों का डाटा उठाकर देख लीजिए, इस्लामी बस्तियों में चोरी-छुपे चलने वाले बम एवं शस्त्र निर्माण जैसे अवैध घरेलू जिहादी कुटीर-उद्योगों में असावधानीवश हुई दुर्घटनाओं के अलावा 25 से 30% मुस्लिम जनसंख्या वाले देश भारत के अंदर होने वाली आगज़नी की घटनाओं में आपको 2 से 3% घटनाएं भी ऐसी नहीं मिलेंगी जिनमें कि किसी भी प्रकार की मुस्लिम-संपत्ति का विनाश हुआ हो।

शलोॐ…!